एक बूढ़ी सी औरत थी , उसको नानी कहता था,
साल भर इंतज़ार करूँ, फिर नानी घर मैं रहता था।
मेरा नानी घर आज वहीं , बस नानी उसमे रहती नहीं ,
देख मैं फिर हुड़दंग करूँ , बस अब वो कुछ कहती नहीं।
आज फिर मुझे तू डांट लगा , फिर मुझे एक चूरी बना दे,
माखन तो मैं खा लूंगा , कहानी सुना मुझे जीना सीखा दे।
सफ़ेद मेघ से सफ़ेद बाल , देख आज फिर ये हज़ार सवाल ,
देकर तू तर्क सही , आज फिर मुझे तो चुप करा दे।
देख अब तो बहुत हुआ , तेरे बिन सब खलता है ,
आजा तू फिर से बस जा यहीं , इस घर को फिर से नानी घर बना दे!!!
साल भर इंतज़ार करूँ, फिर नानी घर मैं रहता था।
मेरा नानी घर आज वहीं , बस नानी उसमे रहती नहीं ,
देख मैं फिर हुड़दंग करूँ , बस अब वो कुछ कहती नहीं।
आज फिर मुझे तू डांट लगा , फिर मुझे एक चूरी बना दे,
माखन तो मैं खा लूंगा , कहानी सुना मुझे जीना सीखा दे।
सफ़ेद मेघ से सफ़ेद बाल , देख आज फिर ये हज़ार सवाल ,
देकर तू तर्क सही , आज फिर मुझे तो चुप करा दे।
देख अब तो बहुत हुआ , तेरे बिन सब खलता है ,
आजा तू फिर से बस जा यहीं , इस घर को फिर से नानी घर बना दे!!!
No comments:
Post a Comment