Friday, March 4, 2016

नानी घर

एक बूढ़ी सी औरत थी , उसको नानी कहता था,
साल भर इंतज़ार करूँ, फिर नानी घर मैं रहता था।

मेरा नानी घर आज वहीं , बस नानी उसमे रहती नहीं ,
देख मैं फिर हुड़दंग करूँ , बस अब वो कुछ कहती नहीं।

आज फिर मुझे तू  डांट लगा , फिर मुझे एक चूरी बना दे,
माखन तो मैं खा लूंगा , कहानी सुना मुझे जीना सीखा दे।

सफ़ेद मेघ से सफ़ेद बाल , देख आज फिर ये हज़ार सवाल ,
देकर तू तर्क सही , आज फिर मुझे तो चुप करा दे।

देख अब तो बहुत हुआ , तेरे बिन सब खलता है ,
आजा तू फिर से बस जा यहीं , इस घर को फिर से नानी घर बना दे!!!



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