Wednesday, March 23, 2016

गोरखधंधा

हिन्दू , मुस्लिम , सिख , ईसाई,सबके दिल में एक कसाई।

काट के सब को खा जाते हैं ,
फिर उपरवाले की लीला बताते हैं।

इंसानियत का निकाल के दिवाला,
देखो पैसों का भण्डार लगा डाला।

गिरिजाघर , ये मंदिर, मस्जिद और शिवाला ,
बस सबका उपरवाला एक रखवाला।

हमारा कफ़न भी बेच कर ये खा जायेंगे ,
अरे! रखवाले परमपिता आप कब आएंगे??

अब कुछ कहानियों से कितना डरते हैं ,
पगलाए इस कदर के सिर्फ आसमानी बातें करते हैं।

अल्लाह ने नहीं बल्कि सिरफिरों ने अल्लाह को बनाया ,
कुछ पात्र नकली गढ़, हम सबका खूब बनाया।

मायूस ना हों , यीशु समय निकाल फिर आएंगे ,
आकर फिर पानी को शराब बनाएंगे।

मर्यादापुरुषोत्तम आकर फिर संसार संवार देंगे ,
चाहे फिर से अपनी अर्धांगिनी को घर से निकाल देंगे।

सब कुछ सहमे हैं उपरवाले के खौफ से ,
देखो कहीं बैठा वो ठाठ से ,जी लो जीवन बस अपने शौक से।

नज़र मिलनी होगी तो ज़रूर मिलाएंगे ,
मगर जन्नत के मुगालते में ये जीवन ना गवाएंगे।

अगले जीवन की छोडो, बस हम याद बन जाएंगे ,
फरिश्तों और हूरों का तो पता नहीं, हम मर कर खाद बन जाएंगे। 

No comments:

Post a Comment