Friday, March 4, 2016

श्वान !!!

देखूँ शीशा तो एक कुत्ता नज़र आता है ,मुझे इन भोंकते गूंगों में एक भाई नज़र आता है।

चलूँ मैं तो पीछा करे , शायद ये कुत्ता भी जानता है ,
हाँ हैं कुछ बुनियादी अंतर , मगर कहीं अधिक समानता है।

एक पैनी सी सीटी , हम दोनों सटीक हो जाते हैं ,
फैंक दे कोई झूठी हड्डी, हम दोनों दुम हिलाते हैं।

आँखों में चमक , जीभ से लार के फव्वारे हैं,
बस सर पे  कोई हाथ फेर दे, हम दोनों दुलार के मारे हैं।

हम सदा मौके की तलाश में, हर कुत्ते का दिन आता है,
असहाय पे क्षण में हम शेर बनें ,देखो ये कुत्ता फिर कैसे गुर्राता है।

इंसान को कुत्ता बताने पर, कुत्ता बड़ा आनंद पता था ,
शायद इसीलिए एक आवाज़ सुन, दौड़ा चला आता था।

लेकिन अब  कुत्ते को झिझक है, कुत्ता तो कोई इंसान नहीं??
कुत्ते को बड़ी शर्म आती है।

आज उसने टोक दिया मुझे बीच में ही ,
अरे ! तू तो अपने बाप का नहीं ,
मेरी जात आज भी वफादारी निभाती है !!!



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