कुछ लकीरों पे चलता पंगु सा ,याद रखने की होड़ में कुछ भूल सा चला हूँ।
इतनी शिद्दत से गुलाम हूँ ,
के असलियत छोड़ , नक़ल को सफल बनाने चला हूँ।
कुछ फटे पन्ने बिखरे हैं मानस पटल पर,
मैं खुद को कुछ सुराग देने चला हूँ।
कभी झोली से मुस्कुराहटें फैंकता मासूम सा ,
खुद को समय से समय में लेकर चला हूँ।
अधीन सा हो कुछ कायदों के ,
मैं किसी अनजान को खुद में भरने चला हूँ।
इस कदर साजिशों से करता गुफ्तगू ,
हरदम मोहरों की बिसात बिछाता चला हूँ।
कुछ पालतू हैं मुगालते भी मेरे ,
अब खुद को ताड़ सा करने चला हूँ।
कुटिलता और मायूसी के महलों से घिरा,
अब मैं इशारे भांप हंसने चला हूँ !!!
इतनी शिद्दत से गुलाम हूँ ,
के असलियत छोड़ , नक़ल को सफल बनाने चला हूँ।
कुछ फटे पन्ने बिखरे हैं मानस पटल पर,
मैं खुद को कुछ सुराग देने चला हूँ।
कभी झोली से मुस्कुराहटें फैंकता मासूम सा ,
खुद को समय से समय में लेकर चला हूँ।
अधीन सा हो कुछ कायदों के ,
मैं किसी अनजान को खुद में भरने चला हूँ।
इस कदर साजिशों से करता गुफ्तगू ,
हरदम मोहरों की बिसात बिछाता चला हूँ।
कुछ पालतू हैं मुगालते भी मेरे ,
अब खुद को ताड़ सा करने चला हूँ।
कुटिलता और मायूसी के महलों से घिरा,
अब मैं इशारे भांप हंसने चला हूँ !!!
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