Monday, April 16, 2018

जानवर !

परमपूज्य, माननीय, प्रेमी, पिताजी, महामहिम,
श्री राम रहीम !

 ... के पकड़े जाने के बाद से सोचता हूँ की नाम के पीछे 'परमानेंटली ' जानवर लगा लूँ ,

ताकि 'डेस्पेरेटेली' सिद्ध कर सकूँ की मैं कोई 'इंसा' नहीं,
भाई! कोई जानता है की 'स्पीशीज' चेंज करवाने की याचिका कहाँ दायर करूँ ?
कागज, दस्तावेज ही बता दो, ताकि खुद को जानवर बता सकूँ !

एक 'आईडिया' है , सोचता हूँ अपने माँ बाप को ही 'एस ए विटनेस' बुला लूँ ,
शायद इसी से अपना केस स्ट्रांग बना लूँ!

वो ये तो बता सकते हैं की हमारे साथ तो सदा ही एक जानवर रहता आया है ,
महोदय, बल्कि हमारा तो पूरा परिवार ही इसे कभी कुत्ता तो कभी गधा सम्बोधित करता आया है।

देखिये ये तो मान ही लीजिये की ये कोई 'इंसा' नहीं,
जानवर हो कर भी इसकी 'गुफ़ा' की भी कोई मंशा नहीं।

कदाचित जानवर होने के भी कुछ नुक्सान हैं ,
थोड़ा डर तो रहेगा,
इस देश के 'विलन ' भी अभिनेता बन महान हैं।

परन्तु 'बेनिफिट और रिस्क' को 'इवलुएट' करके
जानवर बनने में ही फायदा है,
और मेरा 'इंसा' से कोई सरोकार नहीं,
ये ही आज का कायदा है।