Thursday, July 23, 2015

मैं और तुम !!!

मैं फिर कश्मकश में गुम सा हूँ ,

लिख दूँ या रहने दूँ ?
कह दूँ  या सहने दूँ ?

मैं मैं कहाँ,मैं तो तुम सा हूँ ,
मैं फिर कश्मकश में गुम सा हूँ ,

चीखूँ या मूक रहूँ ?
बाग़ी बनूँ या ढोंग रचता रहूँ ?

मैं मैं कहाँ,मैं तो तुम सा हूँ ,
मैं फिर कश्मकश में गुम सा हूँ ,

इतिहास बनूँ या सिर्फ रटता रहूँ ?
कुछ करूँ या सिर्फ तकता रहूँ ?

मैं मैं कहाँ,मैं तो तुम सा हूँ ,
मैं फिर कश्मकश में गुम सा हूँ ,

खोलूँ  आँखें या आँखें मूंदे चलता रहूँ ?
करूँ कोशिश जीने की,या मरते हुए जीता रहूँ ?

मैं मैं कहाँ,मैं तो तुम सा हूँ ,
मैं फिर कश्मकश में गुम सा हूँ ,

ज़हर भरे जाम,फेंकूं,या होठों से लगाये पीता रहूँ ?
बनूँ जो बनना है,या किसी का अक्स बनता रहूँ ?

मैं मैं कहाँ,मैं तो तुम सा हूँ ,
मैं फिर कश्मकश में गुम सा हूँ ,

लूँ एक मासूम किलकारी  फिर से,या एक लाश ढोता रहूँ ?
जागूँ और देखूँ फिर से ,या सिर्फ यूहीं सोता रहूँ ?

मैं मैं कहाँ,मैं तो तुम सा हूँ ,
मैं फिर कश्मकश में गुम सा हूँ ,

स्तब्द्ध हो निहारता एकटक,मैं पूर्णतः सुन्न सा हूँ!

मैं मैं कहाँ,मैं तो तुम सा हूँ ,
मैं फिर कश्मकश में गुम सा हूँ ।।



2 comments:

  1. I really appreciate your writing. It shows dark side of the world. Absolutely amazing writing. Thanks for sharing them with me.

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  2. I really appreciate your writing. It shows dark side of the world. Absolutely amazing writing. Thanks for sharing them with me.

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